लिरिक्स
अंतरा 1
भीड़ में था एक छोटा सा इंसान,
दिल में था उसके खालीपन का तूफ़ान।
दुनिया ने ठुकराया, कोई अपना न था,
पर यीशु की नज़र से कुछ भी छुपा न था।
ऊँचे पेड़ पर चढ़कर वो देखने लगा,
कौन है यीशु, ये जानने लगा।
यीशु ने पुकारा, “जक्कई, नीचे आ,”
उस पल उसके जीवन में उजियारा छा गया।
मुखड़ा
जक्कई के घर आज यीशु आए,
बंद दिल के दरवाज़े खुलते जाएँ।
जिसे दुनिया ने पापी कहकर ठुकराया,
यीशु ने उसे अपना बनाया।
ओ यीशु, तेरी नज़र जब मुझ पर पड़ी,
मेरी सूनी राहों में आशा जगी।
तूने पुकारा, मैंने तेरा नाम लिया,
मेरे जीवन ने नया रास्ता लिया।
अंतरा 2
धन था बहुत, फिर भी दिल था गरीब,
दुनिया की दौलत थी, पर रूह थी करीब
एक मुलाकात ने सब कुछ बदल दिया,
यीशु के प्रेम ने दिल को पिघला दिया।
जक्कई बोला, “प्रभु, अब मैं बदलूँगा,”
गलत कमाई को छोड़कर आगे बढ़ूँगा।
जिससे लिया है, उसे वापस करूँगा,
अपने जीवन को तेरे चरणों में धरूँगा।
मुखड़ा
जक्कई के घर आज यीशु आए,
बंद दिल के दरवाज़े खुलते जाएँ।
जिसे दुनिया ने पापी कहकर ठुकराया,
यीशु ने उसे अपना बनाया।
ओ यीशु, तेरी नज़र जब मुझ पर पड़ी,
मेरी सूनी राहों में आशा जगी।
तूने पुकारा, मैंने तेरा नाम लिया,
मेरे जीवन ने नया रास्ता लिया।
ब्रिज
तेरी नज़र में कोई छोटा नहीं,
तेरे प्रेम से दूर कोई होता नहीं।
जो खो गया है, तू उसे ढूँढता है,
टूटे हुए दिल को फिर से जोड़ता है।
मैं भी आज तेरे पास आया हूँ,
अपना जीवन तुझे सौंपने आया हूँ।
मेरे दिल में भी प्रभु तू आ जा,
अपनी कृपा से मुझे बदल जा।
अंतिम मुखड़ा
मेरे घर में भी यीशु आए,
मेरे दिल के दरवाज़े खुलते जाएँ।
जो कुछ था मेरा, तुझे सौंप दिया,
तेरे प्रेम ने मुझे नया कर दिया।
जक्कई की तरह मैं भी पुकारूँ,
तेरे चरणों में अपना जीवन वारूँ।
तू ही मेरा जीवन, तू ही सहारा,
यीशु तू ही है मेरा रखवाला।
समापन
यीशु ने पुकारा… जक्कई बदल गया,
प्रेम की एक नज़र से जीवन सँवर गया।
आज वही यीशु मुझे भी बुलाता है,
“मेरे पास आ…” कहकर गले लगाता है।
